Monday 30 December 2013

नया साल

 

तमन्नाओं, नए सपनों के पालिन्दे बांधें
आया फिर नया साल भी अब भाता नहीं

अच्छे लगने वाले शुभ सन्देश, शुभकामनाएं
औपचारिकता करना भी अब सिखाता नहीं

सरकार के झूठे दिलासे , वादे- कसमें
देश के बिगड़ते हालात भी अब तड़पाते नहीं

पड़ोसनों की हंसी - ठिठोली चटपटी बातें
दोस्तों का संग भी अब भरमाता नहीं

तितलियों की अटखेलियां, भँवरे की मस्ती
सतरंगी इंद्रधनुष भी अब कसमसाता नहीं

नीलगगन का उजाला, सुबह की लालिमा
चिड़ियों की चहचहाट भी अब जगाती नहीं

शाम को घर लौटते पंछियों का कारवाँ
रात की आवारगी भी अब बहकाती नहीं

सजना- संवरना, खुद को आयने में निहारना
फूलों का यौवन भी अब महकाता नहीं

अखबार के पन्ने , टी. वी. की स्क्रीन
फ़िल्मी सितारों का मसाला भी अब लुभाता नहीं

पथरीली परछाइयों के पीछे भागना,दोस्ती करना
मिलके बिछड़ना अब बिलकुल बहलाता नहीं

चाँद के आँचल में छिपी गुजरें पलों की यादें
तारों का बेख़ौफ़ मिलन भी अब रुलाता नहीं

तमन्नाओं , नए सपनों के पालिन्दे बांधें
आया फिर नया साल भी अब लुभाता नहीं 

No comments:

Post a Comment